
सिरसा – (अक्षित कम्बोज ) बिश्नोई सभा, सिरसा के 52वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित साप्ताहिक दिव्य कार्यक्रम के अन्तर्गत चल रही जाम्भाणी हरि कथा के तृतीय दिन स्वामी आचार्य गोविन्दशरणानन्द महाराज ने सभी को चेतावनी देते हुए कहा कि मनुष्य इस सांसारिक माया में ऐसे खो जाता है कि उसे ध्यान भी नहीं रहता कि मुझे एक दिन यह संसार छोड़ कर जाना है। वह एक के बाद एक इच्छाओं, तृष्णाओं में खोया रहता है, सभी को यह परेशानी रहती है कि मन भटकता है, लगता नहीं। आचार्य जी ने बताया कि मन में मोहन को धारण कर लो, कोई परेशानी नहीं होगी। हमें अपने कर्मों का फल हर हाल में मिलता है। अत: इस कलियुग को कर्मयुग मान कर अच्छे कर्म करें व अपना जीवन सुधारें। इस विषय पर उन्होंने मथुरा पटरानी, भीष्म पितामह, श्री कृष्ण, श्री गुरु जम्भेश्वर महाराज व भुआ तान्तु का उदाहरण देते हुए बताया कि सभी को पूर्व जन्मों के कर्मों का फल भुगतना पड़ा। उन्होंने बिश्नोई पंथ में संध्या मंत्र की महिमा बताई व इसकी व्याख्या भी की। आचार्य जी ने चेताया कि हमें ईश्वर व मृत्यु को हमेशा याद रखना चाहिए, ताकि हम अच्छे रास्ते पर चल सकें। उन्होंने मनुष्य जीवन को ‘गोकुल वास’ बताया, क्योंकि यह हमारा स्थायी निवास नहीं है। कथा में आचार्य अमृतानन्द, स्वामी सच्चितानन्द, स्वामी इन्द्रनाथ का सान्निध्य रहा। सभा प्रधान खेमचन्द बैनीवाल, उपप्रधान कृष्णपाल बैनीवाल, सचिव ओ पी बिश्नोई, कोषाध्यक्ष राजकुमार बैनीवाल, सहसचिव / कार्यकारी सचिव भूपसिंह कस्वां, सहसचिव जगतपाल कड़वासरा, संचालक समिति सदस्य देशकमल बिश्नोई, सुशील कुमार बैनीवाल के अतिरिक्त सेवक दल से महेन्द्र, जगदीश बैनीवाल, रामचन्द्र, दारा सिंह डेलू, हंसराज व महासभा जिला अध्यक्ष रिछपाल बैनीवाल उपस्थित थे। अन्य महानुभावों में पूर्व डायरेक्टर कृभको नरेन्द्र भादू, शमशेर, पवन कुमार कड़वासरा, हवा सिंह बैनीवाल, हरदत्त बैनीवाल, हनुमान गोदारा, हनुमान पूनिया पूर्व सरपंच, सुशील पंजुआना इत्यादि प्रमुख रूप से उपस्थित थे। वहीं सम्मानित विशेष दानदाताओं में अटलवीर बैनीवाल, सावित्री देवी व शिवकुमार बैनीवाल शामिल थे। कथा में नजदीक व दूर के गांवों से भारी संख्या में महिला, पुरूष व बच्चों ने उपस्थिति दर्ज करवाई। आरती व प्रसाद वितरण उपरान्त कथा को विराम दिया गया। @newstodayhry #newstodayhry




