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कालिदास जयंती: भारतीय संस्कृति और साहित्यिक विरासत का सम्मान – स्वामी रमेश साहुवाला II

कालिदास जयंती: भारतीय संस्कृति और साहित्यिक विरासत का सम्मान – स्वामी रमेश साहुवाला II

सिरसा-(अक्षित कम्बोज):- कालिदास की रचनाएँ भारत की सांस्कृतिक और साहित्यिक पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं तथा उनकी जयंती हमें अपनी समृद्ध विरासत का सम्मान करने का अवसर देती हैं। ये शब्द लाॅयन्स क्लब सिरसा अमर के संस्थापक अध्यक्ष स्वामी रमेश साहुवाला ने स्थानीय कोर्ट कॉलोनी में साधकों को संबोधित करते हुए कहे। उन्होंने कहा महान कवि कालिदास भारतीय जीवन और दर्शन के विविध स्वरूपों और मूल तत्वों का अपने महाकाव्यों में वर्णित करने वाले, प्राचीन भारत के महान नाटककार, देववाणी संस्कृत के प्रकांड विद्वान तथा मेघदूत व अभिज्ञान शाकुन्तलम्, मेघदूतम और ऋतुसंहार जैसे महाकाव्य के रचनाकार थें।

श्री साहुवाला ने कहा कि:-

कालिदास जयंती का महत्व भारत की सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान संस्कृत साहित्य और कला को बढ़ावा देना हैं, उनके योगदानों को याद करने का एक अवसर हैं, जिसमें उनकी अद्वितीय काव्य-रचनाएँ, भारतीय दर्शन और मूल्यों का चित्रण और प्रकृति के प्रति उनका प्रेम शामिल हैं। उन्होंने कहा कालिदास की रचनाएँ साहित्यिक सौदर्य के साथ-साथ आदर्शवादी परंपरा और नैतिक मूल्यों को भी दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कालिदास जयंती के अवसर पर देशभर में उनके जीवन और कार्यों पर आधारित नाटक, नृत्य और कविता पाठ जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं जो नई पीढ़ी को कला और साहित्य से जोड़ते हैं। उन्होंने कहा सरकार और अन्य संस्थाएं कालिदास सम्मान प्रदान करती हैं, जो नृत्य, संगीत और रंगमंच जैसे कला के विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्धियों के लिए दिया जाता हैं तथा यह सम्मान कालिदास की विरासत का सम्मान और कलात्मक उत्कृष्टता का प्रोत्साहित करता हैं। उन्होंने कहा विश्व में संस्कृत साहित्य के उत्तमोत्तम समृद्धि के लिए उन्हें सदैव याद किया जाएगा तथा उनके साहित्यिक रचनाओं से हमें प्रेरणा लेने की जरूरत हैं जिससे हमें भी इतिहास के बारे में जानकारी मिलेगी। । #newstodayhry @newstodayhry

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