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काली माता मंदिर में सावन के चौथे सोमवार को किया रुद्राभिषेक और भजन ll

काली माता मंदिर में सावन के चौथे सोमवार को किया रुद्राभिषेक और भजन ll

ओढ़ां – (अशोक गर्ग) गौशाला रोड स्थित श्री काली माता मंदिर ओढ़ा में सावन के चौथे सोमवार पर पुजारी अशोक शर्मा ने श्रद्धालुओं की मनोकामना पूर्ति के लिए विशेष रूप से मिट्टी से निर्मित पवित्र ‘पार्थिव शिवलिंग’ पर मुख्य यजमान लखमी चंद के हाथों विधि-विधान से महा-रुद्राभिषेक संपन्न करवाया। मंदिर परिसर में करीब 1 घंटे तक चले इस पावन अनुष्ठान के दौरान वैदिक मंत्रोच्चारण की गूंज से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। मुख्य यजमान लखमी चंद ने परिवार की सुख-समृद्धि और जनकल्याण की भावना के साथ भगवान शिव का रुद्राभिषेक किया। वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ सावन के पवित्र महीने में श्रद्धालुओं की श्रद्धा को देखते हुए पंडित अशोक शर्मा द्वारा विशेष रूप से शुद्ध मिट्टी से ‘पार्थिव शिवलिंग’ तैयार किया गया था। सोमवार की सुबह शुभ मुहूर्त में पंडित जी ने मुख्य यजमान लखमी चंद को पूजा पर बैठाया। उन्होंने अत्यंत शुद्ध और स्पष्ट मंत्रोच्चारण के साथ भगवान भोलेनाथ का जल, गंगाजल, गाय के कच्चे दूध, दही, शहद, घी और शक्कर यानी पंचामृत से अभिषेक करवाया। इसके पश्चात बाबा को बेलपत्र, धतूरा, भांग और फल-फूल अर्पित किए गए। पूजा के अंत में आरती की गई और पंडित जी ने भगत लखमी चंद को विशेष मनोकामना पूर्ण होने का आशीर्वाद दिया। अनुष्ठान संपन्न होने के बाद पंडित अशोक शर्मा ने वहां उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को सावन के चौथे सोमवार, पार्थिव शिवलिंग की पूजा और रुद्राभिषेक के फलदायी महत्व के बारे में विस्तार से बताया कि सावन के महीने में पार्थिव के शिवलिंग की पूजा का महत्व सभी प्रकार के शिवलिंगों में सबसे उत्तम माना गया है। इस दिन सच्चे मन से किया गया रुद्राभिषेक मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के पापों और कष्टों को नष्ट कर देता है। सावन के चौथे सोमवार पर किया गया यह अनुष्ठान अकाल मृत्यु के भय को दूर करता है और साधक को सुख, समृद्धि तथा धन-धान्य का आशीर्वाद देता है। महा-रुद्राभिषेक और मुख्य आरती के बाद दोपहर के समय मंदिर परिसर का दृश्य और भी अलौकिक हो गया। मोहल्ले की स्थानीय महिलाएं भारी संख्या में मंदिर में एकत्रित हुईं। सावन के इस पावन उत्सव पर महिलाओं ने अपनी संस्कृति और लोक परंपरा को निभाते हुए बागड़ी भाषा में सुंदर और पारंपरिक शिव भजनों का गायन शुरू किया। ढोलक, चिमटे और मंजीरों की थाप पर महिलाओं ने “भोला बाबा थे तो गौरां का भरतार जी” और “डम-डम डमरू बाजे” जैसे भजनों पर जमकर नृत्य किया। इस दौरान महिलाओं की भक्ति और उत्साह देखते ही बनता था। कार्यक्रम के अंत में सभी भक्तों को पंचामृत का प्रसाद वितरित किया गया। इस अवसर पर सन्तोष रानी, गुड्डी रानी, सुलोचना, सुमेशता, पालो देवी, कमला देवी, छिन्दर कोर, निर्मला देवी, बाला देवी, सुनीता देवी, सुमिता देवी सहित अनेक श्रद्धालू महिलाएं उपस्थित रही। @newstodayhry #newstodayhry

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