
सिरसा – ( अक्षित कम्बोज ) मृत्यु जीवन का एक अटल और शाश्वत सत्य है, संसार में जिसने भी जन्म लिया है, उसकी मृत्यु निश्चित है तथा जन्म और मृत्यु प्रकृति के दो ऐसे नियम हैं जिन्हें कोई भी मनुष्य बदल नहीं सकता इसलिए मृत्यु जीवन की अंतिम अवस्था है , जो हमें यह समझती है कि संसार में कुछ भी स्थायी नहीं है। यह शब्द लायंस क्लब सिरसा अमर के संस्थापक अध्यक्ष स्वामी रमेश साहुवाला ने स्थानीय ध्यान मंदिर में डे ऑफ द डेड दिवस पर भक्तों को संबोधित करते हुए कहे। उन्होंने कहा मनुष्य अपने पूरे जीवन में धन ,संपत्ति, परिवार ,पद और प्रतिष्ठा के पीछे भागता रहता है लेकिन मृत्यु के समय इनमें से कोई भी वस्तु उसके साथ नहीं जाती। मनुष्य के साथ केवल उसके अच्छे.बुरे कर्म और उसके द्वारा किए गए कार्यों की यादें रह जाती हैं। इसलिए हमें अपने जीवन में अच्छे कर्म करने चाहिए और दूसरों के प्रति प्रेम ,दया ,करुणा तथा सद्भावना रखनी चाहिए। श्री साहुवाला ने कहा मृत्यु हमें जीवन का वास्तविक महत्व समझाती है तथा यह हमें सिखाती है कि समय बहुत मूल्यवान है और हमें प्रत्येक पल का सदुपयोग करना चाहिए। किसी से घृणा, ईर्ष्या या द्वेष रखने के बजाय सभी के साथ प्रेम और सम्मान से व्यवहार करना चाहिए। उन्होंने कहा मनुष्य का जीवन तभी सार्थक बनाता हैए जब वह अपने जीवन में दूसरों के काम आए और समाज के लिए कुछ अच्छा करे। उन्होंने कहा भारतीय संस्कृति और अध्यात्म में मृत्यु को अंत नहीं बल्कि जीवन की यात्रा का एक पड़ाव माना गया है। उन्होंने कहा मृत्यु से भयभीत होने के बजाय हमें जीवन को अच्छे विचार सच्चे कर्मों और आध्यात्मिक ज्ञान से भरना चाहिए इसलिए हमें ऐसा जीवन जीना चाहिए कि हमारे जाने के बाद भी लोग हमें हमारे अच्छे कर्मों और संस्कारों के लिए याद रखें। उन्होंने कहा मृत्यु जीवन का अंतिम सत्य हैए लेकिन अच्छे कर्म मनुष्य को सदैव अमर बना देते हैं। इसलिए जीवन की वास्तविक सफलता लंबी आयु में नहीं बल्कि श्रेष्ठ विचारों, निस्वार्थ सेवा और अच्छे कर्मों में है। उन्होंने कहा डे ऑफ द डेड का इतिहास लगभग 3000 वर्ष पुराना है जिस में मौत को जीवन का एक स्वाभाविक और सुंदर हिस्सा माना जाता है उन्होंने कहा यह कोई शोक या गम का त्यौहार नहीं हैं बल्कि अपने बिछड़े हुए परिवार के सदस्यों और पूर्वजों की याद में मनाया जाने वाला एक खुशनुमा जश्न है। @newstodayhry #newstodayhry



