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कुरुक्षेत्र में आज रात से होगा संगमेश्वर महादेव का जलाभिषेक II

कुरुक्षेत्र में आज रात से होगा संगमेश्वर महादेव का जलाभिषेक II

आज रात से शुरू होगा जलाभिषेक:-

कुरुक्षेत्र-(संगीत गीत):- कुरुक्षेत्र आज रात से शुरू होगा जलाभिषेक।  कुरुक्षेत्र के मंदिरों में सावन की शिवरात्रि को देखते हुए तैयारी पूरी कर ली गई है 23  जुलाई की देश प्रदेश के मंदिरों में शिवलिंग  पर  जलाभिषेक होगा। हरिद्वार से  चलकर कावड़िये भी अपने अपने गंत्वय की और पहुंच रहे है. मंदिरों में सभी तैयारी भी कर ली  गई है कावड़िये के लिए जगह जगह कावंड शिवर में भोले भक्त के पूरी सेवा भी हो रही है  हरियाणा के कुरुक्षेत्र के ऐतिहासिक संगमेश्वर महादेव मंदिर (अरुणाय) में सावन मास की शिवरात्रि पर लगने वाला 2 दिवसीय मेला भी शुरू हो गया है। मंदिर प्रबंधन की ओर से मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। इस बार शिवरात्रि पर 24 साल बाद गजकेसरी राजयोग बनने जा रहा है। इस दिन चंद्रमा मिथुन राशि में होंगे, जिससे गजकेसरी राजयोग का निर्माण होगा। साथ ही, बुधादित्य राजयोग और मालव्य राजयोग भी बन रहे हैं। यह अत्यंत दुर्लभ और शक्तिशाली योग माने जाते हैं। संगमेश्वर सेवा दल के प्रधान पंडित भूषण गौतम के मुताबिक, आज रात ढाई बजे से मंदिर में संगमेश्वर महादेव पर जल चढ़ाना शुरू हो जाएगा। कतार में लगकर श्रद्धालुओं को मंदिर के गर्भगृह तक पहुंचाया जाएगा। श्रद्धालु को गर्मी और बारिश से बचाने के लिए सिर पर शेड लगाया गया है। लाइन में श्रद्धालुओं के लिए पानी और भोजन की व्यवस्था भी की गई है।  

मंदिर प्रबंधन की ओर से कांवड़ यात्री:-

मंदिर प्रबंधन की ओर से कांवड़ यात्री, दिव्यांग जन और बुजुर्ग लोगों के लिए जल चढ़ाने की अलग से व्यवस्था रहेगी। उनको लाइन में लगने की जरूरत नहीं होगी। उनके लिए गेट नंबर-3 से व्यवस्था बनाई गई है। अगर श्रद्धालुओं की संख्या ज्यादा रही तो जलहरि लगाई जाएगी, ताकि श्रद्धालु मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश किए बगैर बाहर से जल चढ़ा सकें। संगमेश्वर महादेव स्वयंभू हैं। पुराने समय में महात्मा गणेश गिरि को घास के बीच एक दीमक का ढेर दिखाई दिया। उन्होंने अपने चिमटे से इस ढेर को कुरेदा तो उनका चिमटा किसी ठोस चीज से टकराया। उन्होंने मिट्टी को हटाकर देखा तो उन्हें यहां बड़ा सुंदर और तेजस्वी शिवलिंग दिखाई दिया। उन्होंने शिवलिंग को किसी साफ स्थान पर स्थापित करने के लिए उखाड़ना चाहा , मगर शिवलिंग का अंतिम छोर नहीं मिला। मंदिर में एक और चमत्कार देखने को मिलता है। यहां दूध को बिलो कर उससे मक्खन नहीं निकाला जाता है। अगर कोई कोशिश करता है तो दूध खराब हो जाता है। साथ ही मंदिर परिसर में चारपाई या खाट का भी इस्तेमाल नहीं किया जाता है। मान्यता है कि किसी का बुखार ठीक नहीं हो रहा हो, तो 2 दिन मंदिर के भंडारे में भोजन करने से उसका बुखार उतर जाता है संगमेश्वर धाम अरुणा, वरुणा और सरस्वती नदी के संगम से बना है। महाभारत, वामन, गरुड़, स्कंद और पद्म पुराण में वर्णित कथाओं में इसका प्रमाण मिलता है। भगवान शंकर से प्रेरित होकर 88 हजार ऋषियों ने यज्ञ के जरिए अरुणा, वरुणा और सरस्वती नदी का संगम कराया था। इन नदियों के संगम से भोलेनाथ संगमेश्वर महादेव के नाम से विश्व विख्यात हुए।।  #newstodayhry @newstodayhry

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