यूरिया खाद घोटाले में परचेजर प्रमोद शर्मा गिरफ्तार, पूरे रैकेट का पर्दाफाश हो:-लखविंदर सिंह औलख
यूरिया खाद घोटाले में परचेजर प्रमोद शर्मा गिरफ्तार, पूरे रैकेट का पर्दाफाश हो:-लखविंदर सिंह औलख

सिरसा-(अक्षित कम्बोज):-भारतीय किसान एकता (बीकेई) के प्रदेशाध्यक्ष लखविंदर सिंह औलख ने बयान जारी करते हुए कहा कि भारतीय किसान एकता द्वारा की गई शिकायत के आधार पर कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की जांच के बाद सदर थाना डबवाली में एफआईआर संख्या 0233 दिनांक 09 जुलाई 2026 दर्ज की गई थी। इस मामले में आवश्यक वस्तु अधिनियम, फर्टिलाइजर कंट्रोल आॅर्डर तथा भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। औलख ने बताया कि कृषि विभाग की टीम ने इथेनॉल प्लांट से 10 यूरिया खाद के नमूने लिए थे। अब इन नमूनों की जांच रिपोर्ट में 10 में से 8 नमूनों में किसानों को सब्सिडी पर मिलने वाली नीम-कोटेड कृषि यूरिया पाए जाने की पुष्टि हुई है। यह अत्यंत गंभीर मामला है, क्योंकि यह यूरिया केवल कृषि उपयोग के लिए किसानों को उपलब्ध कराई जाती है। उन्होंने कहा कि थाना प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार शनिवार को शुभम इंटरनेशनल, बुराड़ी (दिल्ली) के संचालक से पूछताछ की गई। उसने बताया कि वह परचेजर प्रमोद कुमार को उसके उत्तर प्रदेश स्थित शुगर मिल में कार्यरत रहने के समय से जानता है तथा पिछले लगभग दो वर्षों से, जब प्रमोद कुमार ई-20 ग्रीन फ्यूल्स प्राइवेट लिमिटेड में परचेजर के रूप में कार्यरत है, तभी से उसके कहने पर यूरिया की आपूर्ति कर रहा था। औलख ने कहा कि केवल परचेजर प्रमोद कुमार की गिरफ्तारी से किसान संतुष्ट नहीं हैं। इस पूरे यूरिया खाद की कालाबाजारी के नेटवर्क का खुलासा होना चाहिए। शुभम इंटरनेशनल दिल्ली, झुंझुनू (राजस्थान) से माल लोड करवाने वाले सभी संबंधित व्यक्तियों, परिवहन में शामिल ट्रक चालक एवं वाहन मालिक, तथा इस पूरे नेटवर्क से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति को जांच में शामिल कर गिरफ्तार किया जाए। तभी किसानों के नाम पर अंगूठा लगवाकर सब्सिडी वाली यूरिया की कालाबाजारी करने वाले वास्तविक डीलरों तक पहुंचा जा सकेगा और भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं पर रोक लगेगी। उन्होंने कहा कि भारतीय किसान एकता ने जीएसटी विभाग, दिल्ली को शुभम इंटरनेशनल के बिल एवं शिकायत भेजकर संभावित जीएसटी चोरी की भी जांच की मांग की है। साथ ही राजस्थान सरकार को पत्र लिखकर झुंझुनू से तकनीकी ग्रेड के कट्टों में भरकर भेजी गई यूरिया की पूरी जांच कराने की मांग की गई है, क्योंकि ई-वे बिल में माल की लोडिंग झुंझुनू से दर्शाई गई है। औलख ने कहा कि नीम-कोटेड सब्सिडी वाली यूरिया का प्रत्येक बैग पीओएस मशीन पर किसान के अंगूठे से जारी होता है। इसलिए यदि यही यूरिया शराब, इथेनॉल, प्लाईवुड, कैटल फीड अथवा अन्य उद्योगों में प्रयोग हो रही है तो स्पष्ट है कि यह किसानों के नाम पर उठाई गई खाद की कालाबाजारी का परिणाम है। उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा कि खाद खरीदते समय पूरी सावधानी बरतें तथा जितने कट्टे वास्तव में प्राप्त करें, केवल उतने ही कट्टों पर अपना अंगूठा लगाएं, ताकि उनके नाम पर सब्सिडी वाली खाद की अवैध निकासी न हो सके।@newstodayhry #newstodayhry




